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विशेष सूचना - Arya Samaj, Arya Samaj Mandir तथा Arya Samaj Marriage और इससे मिलते-जुलते नामों से Internet पर अनेक फर्जी वेबसाईट एवं गुमराह करने वाले आकर्षक विज्ञापन प्रसारित हो रहे हैं। अत: जनहित में सूचना दी जाती है कि इनसे आर्यसमाज विधि से विवाह संस्कार व्यवस्था अथवा अन्य किसी भी प्रकार का व्यवहार करते समय यह पूरी तरह सुनिश्चित कर लें कि इनके द्वारा किया जा रहा कार्य पूरी तरह वैधानिक है अथवा नहीं। "आर्यसमाज संस्कार केन्द्र अग्रसेन चौक बिलासपुर" अखिल भारत आर्यसमाज ट्रस्ट द्वारा संचालित बिलासपुर में एकमात्र Legal केन्द्र है। भारतीय पब्लिक ट्रस्ट एक्ट (Indian Public Trust Act) के अन्तर्गत पंजीकृत अखिल भारत आर्यसमाज ट्रस्ट एक शैक्षणिक-सामाजिक-धार्मिक-पारमार्थिक ट्रस्ट है। आर्यसमाज संस्कार केन्द्र अग्रसेन चौक बिलासपुर के अतिरिक्त बिलासपुर में अखिल भारत आर्यसमाज ट्रस्ट की अन्य कोई शाखा या आर्यसमाज मन्दिर नहीं है। Arya Samaj Sanskar Kendra Agrasen Chouk Bilaspur is run under aegis of Akhil Bharat Arya Samaj Trust. Akhil Bharat Arya Samaj Trust is an Eduactional, Social, Religious and Charitable Trust Registered under Indian Public Trust Act. Arya Samaj Sanskar Kendra Agrasen Chouk Bilaspur is the only controlled by Akhil Bharat Arya Samaj Trust in Chhattisgarh. We do not have any other branch or Centre in Bilaspur. Kindly ensure that you are solemnising your marriage with a registered organisation and do not get mislead by large Buildings or Hall.

नैतिक मूल्यों की शिक्षा

नैतिक मूल्यों की शिक्षा -

आधुनिक वैज्ञानिक यन्त्रों (फेसबुक, इन्टरनेट, चलभाष इत्यादि) से बालकों को एक तरफ उन्नति करने का अवसर मिला है तो दूसरी तरफ उससे नैतिक मूल्यों का पतन हुआ है। बालक के जीवन का सबसे अहम् स्थान स्कूल है। वहाँ का वातावरण सीधा उनके मन पर प्रभाव डालता है। उन्हीं स्कूलों में इन्टरनेट को अनिवार्य घोषित किया जा चुका है। इन्टरनेट पर पढाई के अलावा भी तो नाना प्रकार के अनुचित मार्ग पर ले जाने वाले आकर्षण हैं। इन सबकी वजह से बालकों का जीवन तो अनैतिकता के गर्त में जा गिरा है। ऐसी परिस्थिति में माता-पिता, आचार्य का उत्तरदायित्व होता है कि बच्चों को नैतिक मूल्यों की शिक्षा दें। अच्छे संस्कार देते हुए उनको सदाचार से युक्त, सुयोग्य एवं लायक बनावें।

माता निर्माताः भवति माता बच्चे की प्रथम गुरु है। माता को उन्हें कुकर्मों से बचाना होगा, किसी भी अंग से कुचेष्टा न करने पावे ऐसा प्रयास करना होगा। उन्हें सत्यभाषण की आदत डालें, मादक-द्रव्यों से दूर रखें। ऋग्वेद, मण्डल-7, सूक्त-2, मन्त्र-11 का भावार्थः - हे विद्वान! जैसे सूर्य का प्रकाश दिव्य गुणों के साथ नीचे भी स्थित हम सबों को प्राप्त होता है और सत्य विद्या से युक्त उत्तम संतान वाली माता सुखपूर्वक स्थित होती है, वैसे ही विद्वान हम सबों को, विशेषकर बालकों को, आप प्राप्त होकर अच्छी शिक्षा से सुखी कीजिये।

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